© 2026 Saurabh Dubey. All Rights Reserved.


बोतलों का खालीपन


पहुँचे महफ़िल में कुछ नमूने, अपनी 'Clarity' की दुकान लेकर,

जैसे तपते रेगिस्तान में कोई घूमे, 'Raincoat' का सामान लेकर।


किताबें पढ़कर उन्हें लगा, सलीका ही दुनिया का असली 'High' है,

पर यहाँ तो ज्ञान की हर दलील, बस चखने की एक मूँगफली भाई है।


वो होश की बातें ऐसे बोल रहे थे, जैसे डिस्को में भजन बज रहा हो,

और उनका साफ़ ज़हन सबको, बिना नमक के सलाद सा खल रहा हो।


ड्रिंकर्स तो दरियादिल हैं, जो एक 'Cheer' पर जाँ लुटाते हैं,

और ये बेचारे? ये तो 'नींबू-सोडा' में भी 'Logic' और 'Calorie' मिलाते हैं।


कितने 'Stupid' हैं ये जो महफ़िल में 'Moral Science' के लेक्चर झाड़ते हैं,

जहाँ पूरी दुनिया 'High' हो, वहाँ ये 'Soberness' के झंडे गाड़ते हैं।


उन्होंने कंधे दिए, नखरे उठाए, और संभाला हर लड़खड़ाता हुआ पल,

पर बाजी वो दो पेग मार गए, जिनका नशा सिर चढ़ बोल रहा आज-कल।


थक-हार कर वो अपनी 'Endangered Species' वाली दुनिया में लौट जाते हैं,

अपनी कॉफ़ी और चाय के कप में, वो महँगी शराब का शोर घोंट जाते हैं।


समझ आ गया उन्हें, यहाँ बेकार है होश में रहकर फालतू की फिक्र करना,

इन चमकते ग्लासेस के बीच, खुद को 'Fit-In' करने का ज़िक्र करना।


अजीब 'Class' है इस महँगी दुनिया की, जहाँ होश में रहना एक गाली है,

जहाँ इंसान की 'Value' से ज़्यादा, उस 'खाली बोतल' की साख निराली है।


बड़ा महँगा सौदा निकला ये होश, ये फिक्र, और ये रूहानीपन

जहाँ साफ़ दिमाग एक बोझ है,और वफ़ा का आखिरी सबूत है -

साथ में निपटाई हुई बोतलों का खालीपन।



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